रफ़ीज़ा December 31, 2021 सर्दियों का मौसम था.. सुबह के नौ बज रहे थे.. रात की नींद काफ़ी देर से हुई थी.. इसलिए आँखें खुलने का नाम नहीं ले रही थीं.. संध्या सुमित को कब से आवाज़ लगाये जा रही थी पर सुमित है कि बिस्तर छोड़ने का नाम ही नहीं ले रहा...